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पंचांग कैसे पढ़ें

पंचांग में दिन की पाँच बातें होती हैं: तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार। इस नोट में आज की तिथि नहीं है।

Sandeep Jaiswal·21 October 2026 · 6 min read

पंचांग एक जगह और एक दिन का चंद्र-सौर हिसाब है। यह किसी की जिंदगी का फैसला नहीं है। इसमें पाँच बातें छपी होती हैं: सूर्योदय पर चल रही तिथि, चाँद का नक्षत्र, योग, करण, और वार। झारखंड के घरों में व्रत, त्योहार और किसी काम की शुरुआत इन्हीं पाँच पंक्तियों से देखी जाती रही है। यह नोट बताता है कि उन्हें कैसे पढ़ें। आज की तिथि इसमें नहीं है, क्योंकि इस बीटा में पंचांग का पेज अभी खाली है।

पन्ना किस काम का है

अंग्रेज़ी तारीख धूप का हिसाब है। वही तारीख अगले साल फिर आती है। तिथि चाँद का हिसाब है। चाँद सूरज से जितना आगे बढ़ा, उसका बारह अंश एक तिथि है। तीस तिथियों का एक चांद्र मास होता है। इसलिए त्योहार की अंग्रेज़ी तारीख हर साल हिलती है। पंचांग वह पन्ना है जो इन दोनों घड़ियों को एक शहर पर जोड़ता है।

लोग इसे छोटे सवालों के लिए खोलते हैं। यहाँ सूर्योदय पर कौन सी तिथि है? चाँद किस नक्षत्र में है? शादी, गृह प्रवेश या यात्रा के लिए कोई नाम वाला समय है या नहीं? जवाब आकाश के नाम हैं। वे पढ़ने वाले इंसान का अंक नहीं हैं।

पाँच अंग

अंग हैं तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार। अच्छा पन्ना हर एक का नाम देता है, और पहले चार का वह समय भी जब वह नाम खत्म होता है। वह समय स्थानीय होता है। दूसरे शहर का छपा पन्ना अपने शहर की मिनटों के लिए गलत पर्ची है।

पाँच खाली निशान, तिथि से वार तक

पाँच खाने तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार के लिए हैं। नाम खाली हैं, क्योंकि आज का हिसाब अभी नहीं छपा।

तिथि। चाँद का सूरज से बारह अंश आगे बढ़ना। शुक्ल पक्ष बढ़ते चाँद का है, नई चाँद से पूर्णिमा तक। कृष्ण पक्ष घटते चाँद का है, पूर्णिमा से अमावस्या तक। पूर्णिमा पूरा चाँद है। अमावस्या नया चाँद है। बाकी नाम दोनों पक्षों में दोहराते हैं: प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी। बिना पक्ष के "एकादशी" अधूरा नाम है।

नक्षत्र। चाँद की राह के सत्ताईस बराबर भाग। एक भाग तेरह अंश बीस कला का है। पंचांग वाला नक्षत्र आज के चाँद का है। जन्म-नक्षत्र जन्म के समय के चाँद का है। शब्द एक है, घड़ी दो है।

योग। सूरज और चाँद की जोड़ी हुई चाल का एक और भाग, उतना ही चौड़ा। करण। आधी तिथि। वार। रविवार से शनिवार। गिनती उस जगह के सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक।

दिन सूर्योदय से शुरू होता है

पंचांग का दिन आधी रात से आधी रात नहीं चलता। वह सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है। सूर्योदय पर जो तिथि चल रही हो, वही उस सुबह का नाम है, चाहे वह एक घंटे बाद खत्म हो जाए। अगर एक तिथि दो सूर्योदय ढक ले, तो वह दो सुबहों की तिथि है। अगर एक तिथि दो सूर्योदयों के बीच पूरा होकर निकल जाए, तो उस सुबह उसका नाम नहीं पड़ता।

इसीलिए एक व्रत दो कस्बों में दो अंग्रेज़ी तारीखों पर दिख सकता है। नियम स्थानीय सूर्योदय का है, और उस व्रत का अपना नियम भी, कि गिनती सूर्योदय की तिथि से होगी या किसी बाद के घंटे की तिथि से।

आँगन में सूर्योदय, चाँद, और एक खुली खाली किताब

सुबह का नाम सूर्योदय पर तय होता है। किताब खाली है, क्योंकि आज की पंक्ति अभी नहीं बनी।

सुबह की तिथि वह है जो सूर्योदय पर जिंदा हो, वह नहीं जो दोपहर को चल रही हो।

शहर भी जवाब का हिस्सा है

सूर्योदय स्थानीय है। तिथि बदलते समय दुमका और बहुत पश्चिम का कोई शहर एक ही अंग्रेज़ी तारीख पर अलग तिथि छाप सकते हैं। यह क्षितिज का गुण है, दो विश्वासों की लड़ाई नहीं।

नक्षत्र और योग के खत्म होने के मिनट भी शहर से बदलते हैं। एक शहर में साढ़े दस बजे बंद हुई खिड़की दूसरे शहर में अभी खुली हो सकती है, या पहले ही बंद हो चुकी हो सकती है। दूर के प्रेस का पंचांग लाकर उसकी मिनटों को अपनी मिनट मान लेना, अन्यथा ईमानदार पन्ने को गलत पढ़ने का आम तरीका है।

दो ईमानदार पंचांग तब भी अलग हो सकते हैं जब चाँद का हिसाब अलग सूत्र से हो। दृक् और वाक्य के अंत में मिनटों का, कभी घंटों का, फर्क पड़ता है। अमांत मास अमावस्या पर खत्म होता है। पूर्णिमांत मास पूर्णिमा पर खत्म होता है। एक आकाश पर दो महीने के नाम बैठ सकते हैं। दिवाली की अमावस्या उत्तर भारत के पंचांग में अक्सर कार्तिक की है, और अमांत गिनती में अक्सर अश्विन की। रात वही है। नाम स्कूल का है।

त्योहार तिथि पर टिकते हैं

लक्ष्मी पूजा उस अमावस्या पर है। धनतेरस उसके पहले की कृष्ण त्रयोदशी, छोटी दिवाली कृष्ण चतुर्दशी, गोवर्धन अगले दिन की शुक्ल प्रतिपदा, भाई दूज शुक्ल द्वितीया। छठ का झारखंड और बिहार वाला क्रम उसी के बाद की शुक्ल पक्ष में है: नहाय-खाय चतुर्थी, खरना पंचमी, संध्या अर्घ्य षष्ठी, उषा अर्घ्य सप्तमी। होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा पर है, रंग अगली सुबह। शरद नवरात्र अश्विन शुक्ल प्रतिपदा से है, विजयादशमी शुक्ल दशमी। रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा। मकर संक्रांति तिथि नहीं है। वह सूरज के मकर में प्रवेश का क्षण है।

जनमाष्टमी और महाशिवरात्रि यहाँ बिना अंग्रेज़ी तारीख के हैं, क्योंकि एक से ज्यादा तिथि-नियम चल रहे हैं। 2026 की किसी तारीख का दावा इस नोट में नहीं है।

मुहूर्त एक खिड़की है

मुहूर्त दिन का वह छोटा हिस्सा है जो उस काम के लिए तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार एक साथ अनुमति दें। यह समय-सारणी है। यह धमकी नहीं है, और यह वादा भी नहीं कि काम सफल होगा। खिड़की छोड़ना शुरुआत के समय का चुनाव है। पंचांग बाकी जिंदगी को अंक नहीं देता।

दिन की रोशनी को पंद्रह बराबर हिस्सों में बाँटने की पुरानी गिनती है। हर हिस्से की घड़ी की लंबाई साल भर बदलती है, क्योंकि दिन की लंबाई बदलती है। इसलिए "आज दुमका में मुहूर्त साढ़े ग्यारह से साढ़े बारह" इस नोट में नहीं छपेगा। जब तक शहर का पंचांग गणना न दे, घड़ी का समय आविष्कार होगा।

जन्म का समय अगर धुंधला हो

चाँद एक राशि में दो दिन से थोड़ा ज्यादा रहता है, और एक नक्षत्र में करीब एक दिन। इसलिए ज्यादातर तारीखों पर सुबह और शाम की चंद्र राशि एक ही रहती है। लग्न उलटा है। वह करीब दो घंटे में बदल जाता है। "शाम को" कई लग्न छू सकता है। फॉर्म भरने के लिए 6:00 या 12:00 लिख देना एक लग्न गढ़ना है। लग्न को खाली छोड़िए, और लिखिए कि वह खाली है। किनारे पर चाँद भी राशि या नक्षत्र बदल सकता है। वहाँ चुनाव जबरदस्ती नहीं करना चाहिए।

कुंडली यहाँ चार नाम है: लग्न, चंद्र राशि, जन्म नक्षत्र, और चल रहा दशा। दशा गिनती का नाम है, भविष्यवाणी नहीं। पब्लिक पेज अभी चक्र नहीं खींचता। संख्याएँ पंडित के जाने हुए चक्रों से अभी मिलाकर साइन नहीं हुई हैं। उन्हें बीटा पढ़िए, प्रमाणित प्रति नहीं।

पंचांग पढ़ना समझ और विश्वास के लिए है। यह स्वास्थ्य, मृत्यु, धन या कानून का वादा नहीं है।

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